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यूपीः मच्छरों से परेशान जनता ने पढ़ी 'मच्छर चालीसा', कानपुर में लोगों का अनोखा प्रदर्शन; प्रशासन पर गंभीर आरोप

 Edited By: Mangal Yadav @MangalyYadav
 Published : Apr 01, 2026 11:58 am IST,  Updated : Apr 01, 2026 12:02 pm IST

कानपुर के किदवई नगर में लोग मच्छरों से परेशान हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रशासन शिकायत करने पर भी कोई सुनवाई नहीं करता। विरोध में लोगों ने मच्छर चालीस भी पढ़ी।

प्रदर्शन करते लोग- India TV Hindi
प्रदर्शन करते लोग Image Source : REPORTER

कानपुरः कानपुर शहर की व्यस्त सब्जी मंडी किदवई नगर चालीस दुकान के पास एक अनोखा दृश्य देखने को मिला। मच्छरों के बढ़ते आतंक से त्रस्त स्थानीय लोग मंगलवार शाम को इकट्ठा होकर 'मच्छर चालीसा' पढ़ने लगे। यह कोई धार्मिक अनुष्ठान नहीं था, बल्कि मच्छरों से मुक्ति की गुहार और नगर निगम की उदासीनता के खिलाफ एक अनोखा विरोध प्रदर्शन था। शाम ढलते ही मच्छरों की फौज टूट पड़ती है, जिससे लोगों का रोजमर्रा का जीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।

शाम होते ही दिखने लगते हैं बड़े-बड़े मच्छर

क्षेत्र के निवासी बताते हैं कि सूरज ढलने के साथ ही मच्छरों का आतंक शुरू हो जाता है। न खुली हवा में बैठना संभव है, न चैन से खाना खाना। ऐसे में आमजनों का उठना-बैठना बेहद मुश्किल हो गया है। सुबह और शाम के समय स्थिति सबसे भयावह हो जाती है। इतने घने मच्छर हो गए हैं कि एक जगह कुछ पल भी बैठना चुनौतीपूर्ण लगता है। लोग कह रहे हैं कि मच्छर काट-काटकर उनका जीना मुहाल कर दिया है। रात में सोना अब एक बड़ी समस्या बन गई है। बड़े-बड़े मच्छर डेंगू वाले की तरह दिखते हैं, जो देखने में ही डरावने लगते हैं।

इस अनोखें प्रदर्शन के माध्यम से जनता ने बताया कि कानपुर नगर में मच्छरों की समस्या विकराल रूप ले चुकी है। उन्होंने कहा, "शाम होते ही मच्छरों का हमला शुरू हो जाता है। लोग घरों में बंद रहने को मजबूर हैं। नगर निगम द्वारा प्रतिदिन नियमित फॉगिंग न होने से यह समस्या दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है।" क्षेत्रीय निवासी देवराज जोशी ने अपनी पीड़ा साझा करते हुए कहा कि "रात में सोना अब चुनौती बन गया है। मच्छर इतने खतरनाक हैं कि नींद तक नहीं आती। कानपुर को स्मार्ट सिटी का दर्जा मिला है, लेकिन जमीनी हकीकत बिल्कुल अलग और डरावनी है। यहां बुनियादी सुविधाओं की कमी साफ दिख रही है।"

यहां देखें वीडियो

नगर निगम पर लापरवाही का आरोप

लोगों का आरोप है कि नगर निगम की लापरवाही इस समस्या की मुख्य वजह है। नियमित फॉगिंग, नालियों की सफाई और लार्वा नियंत्रण के अभाव में मच्छरों की संख्या अनियंत्रित रूप से बढ़ गई है। हर समय संक्रमण का डर सताता रहता है। ऐसे में जनता पर हर वक़्त डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया जैसी बीमारियों का खतरा मंडरा रहा है, खासकर बच्चों और बुजुर्गों के लिए। कई परिवार रात को मच्छरदानी लगाने के बावजूद परेशान रहते हैं। कुछ लोग तो मजाक में कह रहे हैं कि मच्छर अब 'कानपुर स्पेशल' हो गए हैं बड़े, आक्रामक और लगातार काटने वाले।

प्रदर्शनकारियों ने पढ़ी मच्छर चालीसा  

इस अनोखे विरोध में स्थानीय लोग शामिल हुए, जिनमें महिलाएं, बच्चे और पुरुष शामिल थे। उन्होंने सामूहिक रूप से मच्छर चालीसा पढ़कर मच्छरों से मुक्ति की कामना की और प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की। लोगों ने कहा कि अगर समय रहते फॉगिंग, ड्रेनेज सिस्टम की सफाई और जागरूकता अभियान नहीं चलाया गया तो समस्या और गंभीर रूप ले सकती है।

निवासियों की मांग है कि नगर निगम अधिकारी क्षेत्र का दौरा करें, समस्या को गंभीरता से लें और तुरंत समाधान निकालें। अन्यथा ऐसी अनोखी 'चालीसा' और विरोध के रूप और भी देखने को मिल सकते हैं। कानपुरवासियों की यह पीड़ा सिर्फ एक इलाके की नहीं, पूरे शहर की साझा समस्या बनती जा रही है। उम्मीद है कि प्रशासन जल्द ही सक्रिय होगा और मच्छरों का आतंक कम होगा, ताकि लोग चैन की सांस ले सकें। यह घटना केवल किदवई नगर तक सीमित नहीं है। कानपुर के कई अन्य इलाकों में भी मच्छरों की शिकायतें आ रही हैं। स्थानीय लोगों की यह रचनात्मक गुहार प्रशासन के लिए एक चेतावनी है कि जनसमस्याओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। अगर स्मार्ट सिटी का सपना साकार करना है तो स्वास्थ्य और स्वच्छता जैसे बुनियादी मुद्दों पर प्राथमिकता देनी होगी।

क्या कहते हैं स्वास्थ्य विशेषज्ञ

कानपुर जैसे औद्योगिक शहर में गर्मी बढ़ने के साथ मच्छरजनित बीमारियां आम हो गई हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, खड़े पानी, गंदी नालियां और अनियंत्रित कचरा मच्छरों के प्रजनन स्थल बन रहे हैं। नगर निगम को चाहिए कि तुरंत प्रभावी कदम उठाए नियमित फॉगिंग अभियान चलाए, घर-घर सर्वे करे और लोगों को बचाव के उपाय बताए। साथ ही, मोबिल ऑयल या अन्य वैज्ञानिक तरीकों से लार्वा नियंत्रण पर भी ध्यान दिया जाए।

कानपुर से अनुराग श्रीवास्तव की रिपोर्ट

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